Saturday, 10 November 2012

यदि है पूत सपूत



 


माया जोड़ें क्यों भला, यदि है पूत सपूत।
जोड़ी वो किस काम की, है यदि पूत कपूत।
है यदि पूत कपूत, कुकर्मों में खो देगा।
होगा अगर सपूत, सुकर्मों से जोड़ेगा।
कहे कल्पना साँच, ईश पर सब कुछ छोड़ें।
कैसा भी हो पूत, किसलिए माया जोड़ें। 
 
सुफलित होती प्रार्थना, जब मन हो शुभराह।
ईश विनय के मंत्र से, होते सफल उपाय।
होते सफल उपाय, सुलझती स्वयं उलझनें।
कर्म रेखियाँ आप, साधतीं सभी अड़चनें।
होवें कभी न आप, किसी भी दुख में विचलित।
मन में हों शुभ भाव, प्रार्थना होती सुफलित। 

 

-कल्पना रामानी

No comments:

पुनः पधारिए


आप अपना अमूल्य समय देकर मेरे ब्लॉग पर आए यह मेरे लिए हर्षकारक है। मेरी रचना पसंद आने पर अगर आप दो शब्द टिप्पणी स्वरूप लिखेंगे तो अपने सद मित्रों को मन से जुड़ा हुआ महसूस करूँगी और आपकी उपस्थिति का आभास हमेशा मुझे ऊर्जावान बनाए रखेगा।

धन्यवाद सहित

--कल्पना रामानी

Google+ Followers

मेरी प्रकाशित ई बुक

जंगल में मंगल

जंगल में मंगल

प्रेम की झील

प्रेम की झील